झारखंड की जनजातियाँ: संस्कृति, समाज और समकालीन परिदृश्य

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प्रस्तावना

झारखंड को “वनों की भूमि” कहा जाता है। यहाँ 32 अनुसूचित जनजातियाँ (STs) निवास करती हैं, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 26.21% हैं (जनगणना 2011)। इन समुदायों की अपनी विशिष्ट भाषाएँ, जीवन-पद्धतियाँ, प्रकृति-आधारित आस्थाएँ और समृद्ध लोक-संस्कृति है। प्रमुख जनजातियों में संथाल, मुंडा, उरांव (कुरुख), हो, खड़िया, भूमिज, खरवार, बिरहोर आदि शामिल हैं।


1️⃣ पारंपरिक जीवन-आधार के अनुसार वर्गीकरण

श्रेणीप्रमुख जनजातियाँजीवन-शैली
शिकारी–संग्रहकर्ताबिरहोर, कोरवा, पहाड़ी खड़ियावन-आधारित, घुमंतू
झूम/स्थानांतरित खेतीसौरिया पहाड़िया, माल पहाड़ियापहाड़ी ढालों पर खेती
शिल्पकार समूहमहली, लोहरा, करमाली, चिक बड़ाइकबाँस, लोहा, बुनाई
स्थायी कृषकसंथाल, मुंडा, उरांव, हो, भूमिज, खरवारहल-बैलों से कृषि

2️⃣ प्रमुख जनजातियों का परिचय

🟢 संथाल

  • झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति (लगभग 31.86% ST आबादी)
  • भाषा: संताली (मुंडा भाषा परिवार)
  • धर्म: सरना प्रमुख, कुछ ईसाई
  • पर्व: सोहराय, करम, बाहा
  • विशेषता: नृत्य, गीत और लोककथाएँ

🟢 मुंडा

  • राजनीतिक-सामाजिक रूप से सक्रिय समुदाय
  • भाषा: मुंडारी
  • पर्व: सरहुल, माघे, फगुआ
  • ऐतिहासिक व्यक्तित्व: Birsa Munda

🟢 उरांव (कुरुख)

  • प्रमुख कृषक समुदाय
  • भाषा: कुरुख
  • पर्व: सरहुल, करम, जिति‍या
  • सशक्त पारंपरिक सामाजिक संगठन

🟢 हो

  • मुख्यतः पश्चिमी सिंहभूम (कोल्हान) क्षेत्र
  • भाषा: हो
  • शासन व्यवस्था: पारंपरिक मुंडा-मानकी प्रणाली

🟢 बिरहोर (PVTG)

  • अत्यंत कम जनसंख्या, वन-निर्भर
  • जीवन संकट: वनों की कटाई, आजीविका हानि

🟢 खड़िया

  • उपसमूह: ढेलकी, दूध, पहाड़ी खड़िया
  • पेशा: कृषि, वनोपज संग्रह

🟢 भूमिज

  • सिंहभूम क्षेत्र में प्रमुख
  • पर्व: बाहा, सोहराय

🟢 खरवार

  • ऐतिहासिक रूप से योद्धा, अब कृषक

🟢 माल पहाड़िया (PVTG)

  • झूम खेती, अत्यधिक गरीबी व निरक्षरता

3️⃣ जनसांख्यिकीय स्थिति (जनगणना 2011)

  • कुल ST जनसंख्या: 86.45 लाख
  • ग्रामीण निवास: 91.7%
  • सर्वाधिक ST प्रतिशत वाले जिले: गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा
  • न्यूनतम: कोडरमा, चतरा

सबसे बड़ी जनजातियाँ:
संथाल (31.86%), उरांव (19.86%), मुंडा (14.22%), हो (10.74%)


4️⃣ झारखंड बनाम अन्य राज्य (ST प्रतिशत)

राज्यST प्रतिशत
छत्तीसगढ़30.6%
झारखंड26.2%
ओडिशा22.8%
मध्य प्रदेश21.1%

5️⃣ प्रमुख जनजातीय पर्व

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पर्वमहत्व
सरहुलसाल वृक्ष और प्रकृति पूजा
बाहाफूलों का उत्सव
सोहरायफसल और पशुधन पूजा
माघे परबसिंगबोंगा पूजा (हो जनजाति)
हल पुन्याकृषि वर्षारंभ
सेंदरापारंपरिक शिकार उत्सव

6️⃣ धर्म, भाषा और साक्षरता

🛐 धर्म

  • सरना: 45.23%
  • हिंदू: 37.55%
  • ईसाई: 15.48%

🗣 प्रमुख भाषाएँ

संताली (33%), सदरी, हो, कुरुख, मुंडारी

📚 साक्षरता

  • ST साक्षरता दर: 47.44%
  • उच्च शिक्षा प्राप्त: केवल 3.52%

7️⃣ आर्थिक जीवन

  • कृषि: धान, मक्का, मोटा अनाज
  • वनोपज: तेंदूपत्ता, महुआ, लाख
  • शिल्प: बाँस (महली), लोहा (लोहरा/असुर)

8️⃣ प्रमुख चुनौतियाँ

  • भूमि विस्थापन
  • वनों की कटाई
  • कम शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ
  • कुपोषण और पलायन

9️⃣ निष्कर्ष

झारखंड की जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक आत्मा हैं। आधुनिकीकरण के बावजूद ये समुदाय प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन मूल्यों को जीवित रखे हुए हैं। इनके सतत विकास हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण पर केंद्रित नीतियाँ अत्यंत आवश्यक हैं।

झारखंड की जनजातियों पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. झारखंड में कितनी जनजातियाँ हैं?

झारखंड में आधिकारिक रूप से 32 अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes) मान्यता प्राप्त हैं। इनमें प्रमुख जनजातियाँ संथाल जनजाति, मुंडा जनजाति, उरांव जनजाति, हो जनजाति, खड़िया जनजाति, बिरहोर जनजाति शामिल हैं। साथ ही कई विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) जैसे असुर, बिरहोर और सौरिया पहाड़िया भी हैं।


2. झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है?

संथाल जनजाति झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है, जो राज्य की कुल अनुसूचित जनजाति आबादी का लगभग 31.86% है।


3. झारखंड की जनजातियों का पारंपरिक व्यवसाय क्या है?

अधिकांश जनजातियाँ कृषि, वन आधारित आजीविका और हस्तशिल्प से जुड़ी हैं।
असुर और लोहरा पारंपरिक रूप से लौहकर्म (blacksmith) में कुशल हैं, जबकि महली जनजाति बाँस शिल्प के लिए प्रसिद्ध है।


4. झारखंड की जनजातियाँ कौन-सी भाषाएँ बोलती हैं?

यहाँ की जनजातियाँ मुख्य रूप से ऑस्ट्रो-एशियाटिक और द्रविड़ भाषाएँ बोलती हैं:
• संताली – 33.02%
• हो – 11.11%
• कुरुख/उरांव – 10.82%
• मुंडारी – 10.46%
• खड़िया – 1.59%
• पहाड़िया – 1.68%
इसके अलावा सादरी, नागपुरी और हिंदी भी बोली जाती है।


5. सरना धर्म क्या है?

सरना धर्म झारखंड की अनेक जनजातियों का पारंपरिक प्रकृति-पूजक धर्म है। इसमें साल वृक्ष, जंगल, पहाड़ और पूर्वज आत्माओं की पूजा की जाती है।


6. झारखंड में कौन-कौन से PVTGs हैं?

झारखंड में 9 PVTGs हैं:
असुर, बिरहोर, बिरजिया, पहाड़ी खड़िया, कोरवा, माल पहाड़िया, परहैया, सौरिया पहाड़िया, सावर।
ये जनजातियाँ अत्यधिक सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करती हैं।


7. झारखंड की प्रमुख जनजातीय पर्व कौन-से हैं?

सरहुल – साल वृक्ष और प्रकृति की पूजा
सोहराय – पशुधन से जुड़ा पर्व
मागे परब – हो और मुंडा जनजाति का प्रमुख पर्व
सेंदरा – पारंपरिक शिकार उत्सव
हल पुनहिया – जुताई की शुरुआत का पर्व


8. पारंपरिक वेशभूषा कैसी होती है?

पुरुष सामान्यतः धोती और गमछा पहनते हैं। महिलाएँ साड़ी के साथ पारंपरिक आभूषण पहनती हैं। संथाल और मुंडा महिलाएँ रंगीन पोशाक, मनके की माला और गोदना के लिए प्रसिद्ध हैं।


9. जनजातीय अर्थव्यवस्था किन पर आधारित है?

• कृषि – धान, मक्का, बाजरा
• वनोपज – तेंदू पत्ता, साल बीज, शहद
• शिकार-संग्रह – बिरहोर, सौरिया पहाड़िया
• हस्तशिल्प – महली (बाँस), लोहरा/असुर (लौहकर्म), चिक बड़ाइक (बुनाई)


10. पेशे के आधार पर जनजातियों का वर्गीकरण

• शिकारी-संग्राहक – बिरहोर, कोरवा, पहाड़ी खड़िया
• झूम कृषक – सौरिया पहाड़िया, माल पहाड़िया
• कारीगर – महली, लोहरा, कर्माली
• स्थायी कृषक – संथाल, हो, मुंडा, उरांव


11. जनजातीय साक्षरता दर क्या है?

2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की अनुसूचित जनजातियों की साक्षरता दर 47.44% है।


12. सांस्कृतिक विरासत कैसे संरक्षित होती है?

• पाइटकर पेंटिंग
• सोहराय और खोवर चित्रकला
• लोकनृत्य, लोककथाएँ
• गोदना कला


13. प्रमुख सामाजिक समस्याएँ

भूमि विस्थापन, वनों की कटाई, गरीबी, कुपोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य की कमी, पलायन।


14. जनजातीय महिलाओं की भूमिका

कृषि, वनोपज संग्रह, हस्तशिल्प, सामाजिक निर्णयों और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका।


15. प्रमुख सरकारी योजनाएँ

• वनबंधु कल्याण योजना
• TRIFED
• एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)
• झारखंड स्टेट ट्राइबल डेवलपमेंट सोसायटी


16. पारंपरिक आवास

मिट्टी के घर, फूस की छत — बिरहोर “कुंभा”, संथाल “चाला”, उरांव “पटास”।


17. वनों की कटाई का प्रभाव

आजीविका की हानि, औषधीय पौधों की कमी, विस्थापन।


18. प्रमुख जनजातीय विद्रोह

संथाल विद्रोह (1855-56)
मुंडा विद्रोह (1899-1900)
ताना भगत आंदोलन (1914-19)


19. सर्वाधिक जनजातीय आबादी वाले जिले

गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, पाकुड़।


20. जनजातीय संस्कृति संरक्षण के उपाय

भाषा संरक्षण, सामुदायिक पर्यटन, हस्तशिल्प प्रोत्साहन, विस्थापन रोकना, शिक्षा व स्वास्थ्य सुदृढ़ करना।

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